Ashok Gehlot Wrote A Letter To Bhagwant Mann – अशोक गहलोत ने भगवंत मान को लिखा पत्र: हरिके बैराज से राजस्थान पहुंच रहा प्रदूषित पानी, उठाई ये मांग

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर पंजाब से राजस्थान की नहरों में पहुंचने वाले अनुपचारित पानी (अनट्रीटेड वाटर) के मुद्दे पर उनका ध्यान खींचा है।

पत्र में गहलोत ने मान से आग्रह किया कि वह अनुपचारित पानी के सीधे नदियों व नालों में प्रवाह को रोकने के लिए अपने अधिकारियों को पंजाब के बुड्ढा नाले के कायाकल्प की परियोजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के निर्माण को समय पर पूरा करने का निर्देश दें। 

पत्र में उन्होंने कहा कि राजस्थान को अपने हिस्से का पानी रावी-ब्यास और सतलुज नदियों से हरिके बैराज से प्राप्त होता है। लुधियाना शहर का प्रदूषित पानी बुढ्डा नाले और सतलुज नदी के पास स्थित शहरों/कस्बों का शहरी और औद्योगिक कचरा नालों के जरिये हरिके बैराज तक पहुंचता है।

गहलोत ने पत्र में लिखा है कि हरिके बैराज से आने वाले पानी को राजस्थान फीडर (इंदिरा गांधी फीडर) और फिरोजपुर फीडर में छोड़ा जाता है। पश्चिमी राजस्थान में इंदिरा गांधी फीडर के माध्यम से और हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में फिरोजपुर फीडर के माध्यम से सिंचाई और पीने के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है लेकिन हरिके बैराज से राजस्थान को प्रदूषित पानी मिल रहा है। इस क्षेत्र के किसानों और आम जनता द्वारा समय-समय पर प्रदूषित पानी की आपूर्ति को रोकने की मांग की जाती रही है।

गहलोत ने मान को बताया कि 28 अगस्त को जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा पंजाब और राजस्थान के अधिकारियों के साथ बुड्ढा नाला और सतलुज नदी का संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि अनुपचारित कचरा बुड्ढे नाले में बह रहा है, जो सतलुज नदी के रास्ते हरिके बैराज तक पहुंच रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की है कि पंजाब सरकार द्वारा राज्य के लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर पंजाब से राजस्थान की नहरों में पहुंचने वाले अनुपचारित पानी (अनट्रीटेड वाटर) के मुद्दे पर उनका ध्यान खींचा है।

पत्र में गहलोत ने मान से आग्रह किया कि वह अनुपचारित पानी के सीधे नदियों व नालों में प्रवाह को रोकने के लिए अपने अधिकारियों को पंजाब के बुड्ढा नाले के कायाकल्प की परियोजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के निर्माण को समय पर पूरा करने का निर्देश दें। 

पत्र में उन्होंने कहा कि राजस्थान को अपने हिस्से का पानी रावी-ब्यास और सतलुज नदियों से हरिके बैराज से प्राप्त होता है। लुधियाना शहर का प्रदूषित पानी बुढ्डा नाले और सतलुज नदी के पास स्थित शहरों/कस्बों का शहरी और औद्योगिक कचरा नालों के जरिये हरिके बैराज तक पहुंचता है।

गहलोत ने पत्र में लिखा है कि हरिके बैराज से आने वाले पानी को राजस्थान फीडर (इंदिरा गांधी फीडर) और फिरोजपुर फीडर में छोड़ा जाता है। पश्चिमी राजस्थान में इंदिरा गांधी फीडर के माध्यम से और हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में फिरोजपुर फीडर के माध्यम से सिंचाई और पीने के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है लेकिन हरिके बैराज से राजस्थान को प्रदूषित पानी मिल रहा है। इस क्षेत्र के किसानों और आम जनता द्वारा समय-समय पर प्रदूषित पानी की आपूर्ति को रोकने की मांग की जाती रही है।

गहलोत ने मान को बताया कि 28 अगस्त को जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा पंजाब और राजस्थान के अधिकारियों के साथ बुड्ढा नाला और सतलुज नदी का संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि अनुपचारित कचरा बुड्ढे नाले में बह रहा है, जो सतलुज नदी के रास्ते हरिके बैराज तक पहुंच रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की है कि पंजाब सरकार द्वारा राज्य के लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

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