Child Death From Diphtheria – जिला अस्पताल में डिप्थीरिया से पीड़ित बच्ची ने दम तोड़ा

ख़बर सुनें

बरेली। जिला अस्पताल में भर्ती हुई डिप्थीरिया से पीड़ित सात वर्षीय बच्ची ने रविवार देर रात दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के मुताबिक 40 मिनट पहले ही बच्ची को काफी गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था, उसे फौरन एंटी डिप्थीरियल सीरम (एडीएस) लगाया गया लेकिन फिर भी उसे बचाया नहीं जा सका।
कैंट के गांव नबीनगर में रहने वाले वाहिद खान रात 11:30 बजे सात वर्षीय बेटी अल्फिजा को लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे थे। उन्होंने बताया था कि अल्फिजा की तबीयत करीब एक सप्ताह पहले बिगड़ने लगी थी। स्थानीय इलाज से हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ गई। रविवार सुबह उन्होंने शहर आकर कई निजी अस्पतालों के चक्कर काटे लेकिन किसी ने उसे भर्ती नहीं किया।
जिला अस्पताल में बच्ची को बच्चा वार्ड रेफर किया जहां लक्षणों के आधार पर डिप्थीरिया से पीड़ित मानते हुए उसे तत्काल एडीएस लगाया मगर रात 12.10 बजे बच्ची की सांस थम गई। जिला अस्पताल के एडीएसआईसी एवं सीएमएस डॉ. मेघ सिंह ने बताया कि बच्ची की हालत कई दिन से खराब थी। उसे अगर पहले ही एडीएस लग जाता तो उसकी जान बच सकती थी।
सांस की नली में बन जाती है झिल्ली
डॉ. मेघ सिंह ने बताया कि डिप्थीरिया कॉरीनेबैक्टेरियम बैक्टीरिया के इन्फेक्शन से होता है। बैक्टीरिया पहले गले को नुकसान पहुंचाता है और सांस की नली में झिल्ली बना देता है, जिससे सांस लेने में मुश्किल होती है। खानपान प्रभावित होने से शरीर भी कमजोर होने लगता है। बच्चों को पांच वर्ष की आयु में एडीएस लगाने से जान का जोखिम नहीं होता। डिप्थीरिया के जीवाणु मरीज के मुंह, नाक और गले में रहते हैं। यह रोग संक्रामक होता है। बारिश में बैक्टीरिया तेजी से फैलता है।
डिप्थीरिया के लक्षण, बचाव, इलाज
डिप्थीरिया के लक्षण संक्रमण फैलने के दो से पांच दिनों में दिखने लगते हैं। त्वचा का रंग नीला पड़ने लगता है। सांस लेने में कठिनाई के साथ गर्दन में सूजन और दर्द होता है। तेज बुखार के साथ सांस की नली अवरुद्ध होने से खांसी आती है, खांसने की आवाज भी अलग होती है। इससे बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग नियमित अंतराल पर निशुल्क टीकाकरण करता है।
दो साल बाद हुई डिप्थीरिया से मौत
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक करीब दो साल पहले फरीदपुर में एक बच्चे की डिप्थीरिया से मौत हुई थी। उस दौरान एडीएस वैक्सीन खत्म हो गई थी। तत्कालीन सीएमओ ने मुख्यालय के जरिए सीधे एडीएस की आपूर्ति करने का दावा किया था। पिछले दिनों शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती एक बच्ची डिप्थीरिया पीड़ित मिली थी। समय से एडीएस लगने से वह स्वस्थ है। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने बताया कि एडीएस पर्याप्त मात्रा में हैं। अगर किसी निजी अस्पताल में कोई पीड़ित है तो तत्काल सूचना दें ताकि वैक्सीन लगवाई जा सके।

विस्तार

बरेली। जिला अस्पताल में भर्ती हुई डिप्थीरिया से पीड़ित सात वर्षीय बच्ची ने रविवार देर रात दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के मुताबिक 40 मिनट पहले ही बच्ची को काफी गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था, उसे फौरन एंटी डिप्थीरियल सीरम (एडीएस) लगाया गया लेकिन फिर भी उसे बचाया नहीं जा सका।

कैंट के गांव नबीनगर में रहने वाले वाहिद खान रात 11:30 बजे सात वर्षीय बेटी अल्फिजा को लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे थे। उन्होंने बताया था कि अल्फिजा की तबीयत करीब एक सप्ताह पहले बिगड़ने लगी थी। स्थानीय इलाज से हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ गई। रविवार सुबह उन्होंने शहर आकर कई निजी अस्पतालों के चक्कर काटे लेकिन किसी ने उसे भर्ती नहीं किया।

जिला अस्पताल में बच्ची को बच्चा वार्ड रेफर किया जहां लक्षणों के आधार पर डिप्थीरिया से पीड़ित मानते हुए उसे तत्काल एडीएस लगाया मगर रात 12.10 बजे बच्ची की सांस थम गई। जिला अस्पताल के एडीएसआईसी एवं सीएमएस डॉ. मेघ सिंह ने बताया कि बच्ची की हालत कई दिन से खराब थी। उसे अगर पहले ही एडीएस लग जाता तो उसकी जान बच सकती थी।

सांस की नली में बन जाती है झिल्ली

डॉ. मेघ सिंह ने बताया कि डिप्थीरिया कॉरीनेबैक्टेरियम बैक्टीरिया के इन्फेक्शन से होता है। बैक्टीरिया पहले गले को नुकसान पहुंचाता है और सांस की नली में झिल्ली बना देता है, जिससे सांस लेने में मुश्किल होती है। खानपान प्रभावित होने से शरीर भी कमजोर होने लगता है। बच्चों को पांच वर्ष की आयु में एडीएस लगाने से जान का जोखिम नहीं होता। डिप्थीरिया के जीवाणु मरीज के मुंह, नाक और गले में रहते हैं। यह रोग संक्रामक होता है। बारिश में बैक्टीरिया तेजी से फैलता है।

डिप्थीरिया के लक्षण, बचाव, इलाज

डिप्थीरिया के लक्षण संक्रमण फैलने के दो से पांच दिनों में दिखने लगते हैं। त्वचा का रंग नीला पड़ने लगता है। सांस लेने में कठिनाई के साथ गर्दन में सूजन और दर्द होता है। तेज बुखार के साथ सांस की नली अवरुद्ध होने से खांसी आती है, खांसने की आवाज भी अलग होती है। इससे बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग नियमित अंतराल पर निशुल्क टीकाकरण करता है।

दो साल बाद हुई डिप्थीरिया से मौत

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक करीब दो साल पहले फरीदपुर में एक बच्चे की डिप्थीरिया से मौत हुई थी। उस दौरान एडीएस वैक्सीन खत्म हो गई थी। तत्कालीन सीएमओ ने मुख्यालय के जरिए सीधे एडीएस की आपूर्ति करने का दावा किया था। पिछले दिनों शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती एक बच्ची डिप्थीरिया पीड़ित मिली थी। समय से एडीएस लगने से वह स्वस्थ है। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने बताया कि एडीएस पर्याप्त मात्रा में हैं। अगर किसी निजी अस्पताल में कोई पीड़ित है तो तत्काल सूचना दें ताकि वैक्सीन लगवाई जा सके।

Leave a Comment