Hc Restrains Ex-hockey Coach From Giving Statements, Interviews On Indian Team Captain Manpreet Singh – Sjoerd Marijne Book: एचसी ने पूर्व-हॉकी कोच को बयान देने से रोका, मनप्रीत सिंह के मामले पर पूछताछ भी की

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भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कोच शोर्ड मारिन की किताब से उठे विवाद के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया है। भारत की महिला और पुरुष हॉकी टीम की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बुधवार को शोर्ड से कहा कि पनी पुस्तक में कैप्टन मैनप्रीत सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित कोई भी बयान न जारी करें। इसके साथ ही अदालत ने हाउस हार्पर कॉलिंस पब्लिशर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को कहा है कि किताब का विवादित हिस्सा प्रकाशित करने की कोशिश न करें। 

किताब के विवादित हिस्से से गुजरने के बाद, न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा कि मेरे प्राइमा फेशियल व्यू में, बयान मनप्रीत सिंह की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने वाला है। फिलहाल ऐसा लग रहा है कि मामला मनप्रीत के पक्ष में और मारिन के खिलाफ है। मारिन की किताब “विल पावर: दी इन्साइड स्टोरी ऑफ दी इंक्रेडिबल टर्नअराउंड इन इंडियन हॉकी” बुधवार को प्रकाशित होनी है।

अदालत ने कहा कि ये बयान सार्वजनिक डोमेन में आते हैं, यह मनप्रीत की प्रतिष्ठा के लिए हानिकार हो सकते हैं। अदालत ने कहा, “सुनवाई की अगली तारीख तक शोर्ड को बयान जारी करने से रोका जाता है।” अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। 
क्या है मामला?
शोर्ड मारिन ने अपनी किताब में लिखा है कि 2017 में जब वह भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कोच थे, तब उन्होंने एक युवा खिलाड़ी को राष्ट्रमंडल खेल 2018 की टीम में शामिल किया था। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि वह खिलाड़ी देश के लिए कमाल करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहले तो उन्हें लगा कि दबाव की वजह से युवा खिलाड़ी का प्रदर्शन गिरा है, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि टीम के कप्तान मनप्रीत ने कथित तौर पर उससे इतना अच्छा नहीं खेलने के लिए कहा है, ताकि वह अपने पसंदीदा खिलाड़ी को टीम में वापस ला सकें। 

शोर्ड के इन आरोपों पर भारतीय महिला और पुरुष टीम ने आपत्ति जताई। खिलाड़ियों ने कहा है कि यह पूरी तरह से विश्वास का उल्लंघन है और इससे खिलाड़ी पूरी तरह असुरक्षित महसूस करेंगे। उन्होंने कहा, “हमने आज प्रेस में भूतपूर्व मुख्य कोच शोर्ड मारिन द्वारा लगाए गए कुछ परेशान करने वाले आरोप देखे हैं। हम अपनी व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग और झूठे आरोपों पर अपनी गहरी निराशा व्यक्त करने के लिए एक साथ आए हैं। उन्होंने हमारे कोचिंग के समय का उपयोग व्यावसायिक लाभ के लिए, हमारी प्रतिष्ठा के बदले अपनी पुस्तक को बेचने के लिए किया है।”

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भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कोच शोर्ड मारिन की किताब से उठे विवाद के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया है। भारत की महिला और पुरुष हॉकी टीम की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बुधवार को शोर्ड से कहा कि पनी पुस्तक में कैप्टन मैनप्रीत सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित कोई भी बयान न जारी करें। इसके साथ ही अदालत ने हाउस हार्पर कॉलिंस पब्लिशर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को कहा है कि किताब का विवादित हिस्सा प्रकाशित करने की कोशिश न करें। 

किताब के विवादित हिस्से से गुजरने के बाद, न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा कि मेरे प्राइमा फेशियल व्यू में, बयान मनप्रीत सिंह की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने वाला है। फिलहाल ऐसा लग रहा है कि मामला मनप्रीत के पक्ष में और मारिन के खिलाफ है। मारिन की किताब “विल पावर: दी इन्साइड स्टोरी ऑफ दी इंक्रेडिबल टर्नअराउंड इन इंडियन हॉकी” बुधवार को प्रकाशित होनी है।

अदालत ने कहा कि ये बयान सार्वजनिक डोमेन में आते हैं, यह मनप्रीत की प्रतिष्ठा के लिए हानिकार हो सकते हैं। अदालत ने कहा, “सुनवाई की अगली तारीख तक शोर्ड को बयान जारी करने से रोका जाता है।” अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। 

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