Inflation And Economy: Economies Stuck In Recession Trying To Get Relief From Skyrocketing Inflation – Inflation And Economy : आसमान छूती महंगाई से राहत पाने की कोशिश में मंदी में फंस रहीं अर्थव्यवस्थाएं

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Inflation And Economy: आसमान छूती महंगाई पर काबू पाने के लिए दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने नीतिगत दरें बढ़ाने के रूप में आक्रामक रुख अख्तियार किया है। हालांकि, सख्ती से वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंदी के दलदल में फंसने का खतरा बढ़ गया है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक के चेयरमैन जेरोम पॉवेल का कहना है कि यह कोई नहीं जानता कि ब्याज दरों के बढ़ने से मंदी आएगी। यदि ऐसा होता है तो यह कितनी महत्वपूर्ण होगी, इसका भी पता नहीं है। पावेल ने कहा कि उधारी की आसान नीति की संभावना कम है क्योंकि फेड लगातार चार दशकों में महंगाई का सबसे ज्यादा सामना कर रहा है। 

उन्होंने कहा कि हमें महंगाई को पीछे छोड़ना होगा। उधर, विश्लेषकों ने कहा कि शायद अमेरिका की यह अंतिम वृद्धि दर होगी क्योंकि यदि आप पिछली नीति को भी देखें तो पहली तिमाही के लिए अनुमान 6 फीसदी से कम है और उसके बाद चीजों में सुधार हुआ है, खासकर महंगाई के मोर्चे पर। 

बुधवार को अमेरिकी फेडरल ने ब्याज दर में 0.75 फीसदी का इजाफा किया। इसके बाद बृहस्पतिवार को कई देशों ने ब्याज दरें बढ़ा दीं। सभी देश एक तरफ से महंगाई को काबू पाने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने की योजना जारी रखे हैं।

  • अमेरिका में इस साल ब्याज दरें 4.4 फीसदी तक जा सकती हैं। यह जून के अनुमान से एक फीसदी ज्यादा है। 2023 में यह 4.6% तक जा सकती है।
  • यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने 19 देशों के लिए दरों में तीन चौथाई की बढ़ोतरी की है, जो अब तक की सबसे ज्यादा बढ़त है।

आरबीआई भी कर सकता है 0.50% तक इजाफा
आरबीआई भी महंगाई को रोकने के लिए मई से लेकर अब तक तीन बार में 1.40% दरें बढ़ा चुका है। इसकी मौद्रिक नीति समिति की बैठक 28 से 30 सितंबर के बीच होगी। ऐसा अनुमान है कि रेपो दर में 0.35 से 0.50% तक की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके साथ ही तमाम तरह के कर्ज महंगे हो जाएंगे। ऐसा होता है तो त्योहारी मौसम में खरीदारी पर असर होगा। इसका महंगाई का लक्ष्य 6% से नीचे है, लेकिन यह लगातार इस लक्ष्य से ऊपर ही बनी है।

इन देशों ने की बढ़ोतरी

देश वृद्धि (% में)
अमेरिका 0.75
ताइवान 12.5
हांगकांग 0.75
फिलीपीन 0.50
स्विस बैंक 0.25
इंग्लैंड 0.50
वियतनाम 1.00
नॉर्वे 0.50

मुद्राओं में भारी गिरावट

  • आक्रामक रुख से इंडोनेशिया की मुद्रा रुपियाह 0.1% गिरी।
  • फिलीपीन की मुद्रा 0.5% गिरी।
  • ब्रिटिश पाउंड 37 वर्षों में डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर। इसमें 1.75% की गिरावट रही, जो मई के बाद से सबसे ज्यादा कमजोर।
  • जापानी मुद्रा येन 1986 के करीबी स्तर पर पहुंच गई।
  • ऑस्ट्रेलियाई और न्यूजीलैंड डॉलर जापानी येन की तुलना में 2020 के मध्य के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।
  • चीन का युआन 18 जून, 2020 के बाद 27 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। यूरो में भी 1.1 फीसदी गिरावट रही।

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Inflation And Economy: आसमान छूती महंगाई पर काबू पाने के लिए दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने नीतिगत दरें बढ़ाने के रूप में आक्रामक रुख अख्तियार किया है। हालांकि, सख्ती से वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंदी के दलदल में फंसने का खतरा बढ़ गया है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक के चेयरमैन जेरोम पॉवेल का कहना है कि यह कोई नहीं जानता कि ब्याज दरों के बढ़ने से मंदी आएगी। यदि ऐसा होता है तो यह कितनी महत्वपूर्ण होगी, इसका भी पता नहीं है। पावेल ने कहा कि उधारी की आसान नीति की संभावना कम है क्योंकि फेड लगातार चार दशकों में महंगाई का सबसे ज्यादा सामना कर रहा है। 

उन्होंने कहा कि हमें महंगाई को पीछे छोड़ना होगा। उधर, विश्लेषकों ने कहा कि शायद अमेरिका की यह अंतिम वृद्धि दर होगी क्योंकि यदि आप पिछली नीति को भी देखें तो पहली तिमाही के लिए अनुमान 6 फीसदी से कम है और उसके बाद चीजों में सुधार हुआ है, खासकर महंगाई के मोर्चे पर। 

बुधवार को अमेरिकी फेडरल ने ब्याज दर में 0.75 फीसदी का इजाफा किया। इसके बाद बृहस्पतिवार को कई देशों ने ब्याज दरें बढ़ा दीं। सभी देश एक तरफ से महंगाई को काबू पाने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने की योजना जारी रखे हैं।

  • अमेरिका में इस साल ब्याज दरें 4.4 फीसदी तक जा सकती हैं। यह जून के अनुमान से एक फीसदी ज्यादा है। 2023 में यह 4.6% तक जा सकती है।
  • यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने 19 देशों के लिए दरों में तीन चौथाई की बढ़ोतरी की है, जो अब तक की सबसे ज्यादा बढ़त है।

आरबीआई भी कर सकता है 0.50% तक इजाफा

आरबीआई भी महंगाई को रोकने के लिए मई से लेकर अब तक तीन बार में 1.40% दरें बढ़ा चुका है। इसकी मौद्रिक नीति समिति की बैठक 28 से 30 सितंबर के बीच होगी। ऐसा अनुमान है कि रेपो दर में 0.35 से 0.50% तक की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके साथ ही तमाम तरह के कर्ज महंगे हो जाएंगे। ऐसा होता है तो त्योहारी मौसम में खरीदारी पर असर होगा। इसका महंगाई का लक्ष्य 6% से नीचे है, लेकिन यह लगातार इस लक्ष्य से ऊपर ही बनी है।

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