Lucknow News : Order To Release Sp Spokesperson Ip Singh On Bail, Went To Jail In 22 Year Old Case – Lucknow News : सपा प्रवक्ता आईपी सिंह को जमानत पर रिहा करने का आदेश, 22 साल पुराने मामले में गए थे जेल

आईपी सिंह

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– फोटो : अमर उजाला

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शुक्रवार को सपा प्रवक्ता आईपी सिंह को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने आईपी सिंह की जमानत याचिका को मंजूर करते हुए यह आदेश दिया। इससे पहले बलरामपुर जिले की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने हाजिर न होने पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। बाद में 15 सितंबर को उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।
 
गौरतलब है कि आईपी सिंह पर वर्ष 2000 में जिला पंचायत चुनाव में गड़बड़ी करने का आरोप है। बलरामपुर के देहात थाना पुलिस ने उन्हें बूथ कैप्चरिंग और बवाल के मामले में गिरफ्तार किया था। अब यह मुकदमा बलरामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में विचाराधीन है। सपा प्रवक्ता के न हाजिर होने पर कोर्ट ने उन्हें कई बार समन भेजा लेकिन वह हाजिर नहीं हुए। 

इस पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। सपा प्रवक्ता के वकील देवेंद्र उपाध्याय ने बताया कि वर्ष 2011 में राज्य सरकार ने इस मुकदमे को वापस लेने संबंधी आदेश जारी किया था लेकिन कोर्ट ने मुकदमा वापसी की अनुमति से इन्कार कर दिया था।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शुक्रवार को सपा प्रवक्ता आईपी सिंह को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने आईपी सिंह की जमानत याचिका को मंजूर करते हुए यह आदेश दिया। इससे पहले बलरामपुर जिले की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने हाजिर न होने पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। बाद में 15 सितंबर को उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।

 

गौरतलब है कि आईपी सिंह पर वर्ष 2000 में जिला पंचायत चुनाव में गड़बड़ी करने का आरोप है। बलरामपुर के देहात थाना पुलिस ने उन्हें बूथ कैप्चरिंग और बवाल के मामले में गिरफ्तार किया था। अब यह मुकदमा बलरामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में विचाराधीन है। सपा प्रवक्ता के न हाजिर होने पर कोर्ट ने उन्हें कई बार समन भेजा लेकिन वह हाजिर नहीं हुए। 

इस पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। सपा प्रवक्ता के वकील देवेंद्र उपाध्याय ने बताया कि वर्ष 2011 में राज्य सरकार ने इस मुकदमे को वापस लेने संबंधी आदेश जारी किया था लेकिन कोर्ट ने मुकदमा वापसी की अनुमति से इन्कार कर दिया था।

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