Supreme Mohar After 22 Years Of Struggle – Hsgpc को मान्यता: 22 साल के संघर्ष के बाद लगी सुप्रीम मोहर, सन 2000 में शुरू हुआ था अलग कमेटी का संघर्ष

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वर्ष 2000 में शुरू हुआ हरियाणा के गुरुद्वारों की देखभाल के लिए हरियाणा कमेटी का संघर्ष 22 साल बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ पूरा हुआ है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार के उस एक्ट को ठीक माना है, जिस एक्ट के तहत हरियाणा के गुरुद्वारों की देखभाल के लिए हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया था। जिसके खिलाफ एसजीपीसी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। अब जाकर हरियाणा के सिखों को उनका हक मिला है।

हरियाणा के सिख नेता जगदीश सिंह झींडा, दीदार सिंह नलवी व अन्य सिख नेताओं की अगुवाई में वर्ष 2000 में हरियाणा के गुरुद्वारों की अलग कमेटी की मांग शुरू हुई थी। कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष भजनलाल के नेतृत्व में वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव में अलग कमेटी बनाने की घोषणा को कांग्रेस ने अपनी चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया था।

इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा के नेतृत्व में अलग कमेटी के गठन पर राय देने के लिए 2005 में समिति का गठन कर दिया। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी। इसके बाद भी अलग कमेटी की मांग कर रहे सिख हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा की अगुवाई में आंदोलन चलता रहा।

वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कैथल स्थित खेल स्टेडियम में आयोजित रैली में अलग कमेटी के गठन की घोषणा कर दी। इसके बाद 11 जुलाई 2014 को विधानसभा में एक्ट पास कर दिया। जिसमें अलग कमेटी के चुनाव तक 41 सदस्यों की एडहॉक कमेटी तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा की अगुवाई में गठित कर दी।

कमेटी ने हरियाणा के गुरुद्वारों को अपने अधिकार में लेना शुरू किया। जिसमें चीका में छठी एवं नौंवी पातशाही गुरुद्वारा, कैथल का नीम साहिब व मंजी साहिब गुरुद्वारा, यमुनानगर में थड़ा साहब गुरुद्वारा, कुरुक्षेत्र में डयोडी साहब गुरुद्वारा व लाडवा में बनी बदरपुर गुरुद्वारे को अपने कब्जे में ले लिया।

कुरुक्षेत्र के गुरुद्वारे को हरियाणा कमेटी कब्जे में लेते समय बड़ा बवाल हुआ। हरियाणा सरकार ने उस समय हरियाणा कमेटी व एसजीपीसी के बीच कब्जे के विषय में हस्तक्षेप से स्पष्ट इंकार कर दिया। इसी बीच एसजीपीसी के सदस्यों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हरियाणा कमेटी के एक्ट को चुनौति दी गई। तभी से मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था।

हरियाणा की मौजूदा सरकार ने सीएम मनोहर लाल की अगुवाई में मजबूती से कोर्ट में इस फैसले को लड़ा। इसी बीच एडहॉक कमेटी के अध्यक्ष जगजीत सिंह झींडा ने वर्ष 2020 में स्वास्थ्य कारणों के चलते अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद बलजीत सिंह दादूवाल को अध्यक्ष चुन लिया गया।

एक्ट के तहत कमेटी का हर पांच साल बाद चुनाव होना है। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण एडहॉक कमेटी ही अभी तक हरियाणा में उक्त पांच गुरुद्वारों की देखभाल कर रही है। लंबित केस के कारण चुनाव नहीं हो पाया। एक्ट के तहत हरियाणा के 52 गुरुद्वारे ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं, जिनमें कभी न कभी नौ में से कोई न कोई सिख गुरु पधारे थे।

इनमें से 48 गुरुद्वारों की देखभाल इस समय एसजीपीसी के अधीन है। इसके अलावा कैथल, सिरसा, निसिंग में स्कूल, शाहबाद में मीरी-पीरी कॉलेज सहित अन्य बोर्ड व ट्रस्ट जो हरियाणा में हैं, उनकी देखभाल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कर रही है। जिन्हें अब हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी को सौंपने के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए हैं।

इस फैसले पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जगजीत सिंह झींडा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अब हरियाणा के गुरुद्वारों का सबसे ज्यादा बजट शिक्षा पर खर्च किया जाएगा। यह बडा खुशी का अवसर है, जब हरियाणा के सिखों का दो दशक पुराना संघर्ष रंग लाया है। पूरे हरियाणा की सिख संगत को इस फैसले पर बधाई।

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वर्ष 2000 में शुरू हुआ हरियाणा के गुरुद्वारों की देखभाल के लिए हरियाणा कमेटी का संघर्ष 22 साल बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ पूरा हुआ है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार के उस एक्ट को ठीक माना है, जिस एक्ट के तहत हरियाणा के गुरुद्वारों की देखभाल के लिए हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया था। जिसके खिलाफ एसजीपीसी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। अब जाकर हरियाणा के सिखों को उनका हक मिला है।

हरियाणा के सिख नेता जगदीश सिंह झींडा, दीदार सिंह नलवी व अन्य सिख नेताओं की अगुवाई में वर्ष 2000 में हरियाणा के गुरुद्वारों की अलग कमेटी की मांग शुरू हुई थी। कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष भजनलाल के नेतृत्व में वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव में अलग कमेटी बनाने की घोषणा को कांग्रेस ने अपनी चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया था।

इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा के नेतृत्व में अलग कमेटी के गठन पर राय देने के लिए 2005 में समिति का गठन कर दिया। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी। इसके बाद भी अलग कमेटी की मांग कर रहे सिख हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा की अगुवाई में आंदोलन चलता रहा।

वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कैथल स्थित खेल स्टेडियम में आयोजित रैली में अलग कमेटी के गठन की घोषणा कर दी। इसके बाद 11 जुलाई 2014 को विधानसभा में एक्ट पास कर दिया। जिसमें अलग कमेटी के चुनाव तक 41 सदस्यों की एडहॉक कमेटी तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा की अगुवाई में गठित कर दी।

कमेटी ने हरियाणा के गुरुद्वारों को अपने अधिकार में लेना शुरू किया। जिसमें चीका में छठी एवं नौंवी पातशाही गुरुद्वारा, कैथल का नीम साहिब व मंजी साहिब गुरुद्वारा, यमुनानगर में थड़ा साहब गुरुद्वारा, कुरुक्षेत्र में डयोडी साहब गुरुद्वारा व लाडवा में बनी बदरपुर गुरुद्वारे को अपने कब्जे में ले लिया।

कुरुक्षेत्र के गुरुद्वारे को हरियाणा कमेटी कब्जे में लेते समय बड़ा बवाल हुआ। हरियाणा सरकार ने उस समय हरियाणा कमेटी व एसजीपीसी के बीच कब्जे के विषय में हस्तक्षेप से स्पष्ट इंकार कर दिया। इसी बीच एसजीपीसी के सदस्यों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हरियाणा कमेटी के एक्ट को चुनौति दी गई। तभी से मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था।

हरियाणा की मौजूदा सरकार ने सीएम मनोहर लाल की अगुवाई में मजबूती से कोर्ट में इस फैसले को लड़ा। इसी बीच एडहॉक कमेटी के अध्यक्ष जगजीत सिंह झींडा ने वर्ष 2020 में स्वास्थ्य कारणों के चलते अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद बलजीत सिंह दादूवाल को अध्यक्ष चुन लिया गया।

एक्ट के तहत कमेटी का हर पांच साल बाद चुनाव होना है। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण एडहॉक कमेटी ही अभी तक हरियाणा में उक्त पांच गुरुद्वारों की देखभाल कर रही है। लंबित केस के कारण चुनाव नहीं हो पाया। एक्ट के तहत हरियाणा के 52 गुरुद्वारे ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं, जिनमें कभी न कभी नौ में से कोई न कोई सिख गुरु पधारे थे।

इनमें से 48 गुरुद्वारों की देखभाल इस समय एसजीपीसी के अधीन है। इसके अलावा कैथल, सिरसा, निसिंग में स्कूल, शाहबाद में मीरी-पीरी कॉलेज सहित अन्य बोर्ड व ट्रस्ट जो हरियाणा में हैं, उनकी देखभाल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कर रही है। जिन्हें अब हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी को सौंपने के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए हैं।

इस फैसले पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जगजीत सिंह झींडा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अब हरियाणा के गुरुद्वारों का सबसे ज्यादा बजट शिक्षा पर खर्च किया जाएगा। यह बडा खुशी का अवसर है, जब हरियाणा के सिखों का दो दशक पुराना संघर्ष रंग लाया है। पूरे हरियाणा की सिख संगत को इस फैसले पर बधाई।

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