Vinesh Phogat Lashes Out At Critics On Social Media, Says We Are Athletes, Not Robots – Vinesh Phogat: मंगोलियाई पहलवान से हार पर हुई आलोचना से विनेश फोगाट निराश, बोलीं- हम एथलीट हैं, रोबोट नहीं

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विश्व चैंपियनशिप में भारतीय पहलवानों ने दो पदक अपने नाम किए हैं। विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया ने कांस्य पदक अपने नाम किया। राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के 12 पहलवानों ने भाग लिया था और सभी ने पदक जीते थे, लेकिन विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारतीय पहलवान आशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके। कांस्य पदक जीतने वाली विनेश फोगाट को अपने पहले ही मैच में हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, रेपचेज राउंड में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं। 

क्वालिफाइंग राउंड में विनेश को मंगोलिया की खुलन बटखुयाग के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। यह मैच वह 0-7 के अंतर से हार गई थीं। इसके बाद उनकी जमकर आलोचना हुई थी। अब विनेश ने अपने आलोचकों को करारा जवाब देते हुए कहा है कि वह एथलीट हैं, रोबोट नहीं। इसके साथ ही उन्होंने अपने साथी खिलाड़ियों से लगातार मेहनत करते रहने के लिए कहा है, ताकि आलोचना की यह परंपरा खत्म हो सके। 

विनेश ने इससे पहले भी विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में पदक अपने नाम किया था। इस बार भी 53 किलोग्राम भारवर्ग में पदक जीतने के साथ ही वह भारत की पहली महिला पहलवान बन गईं, जिन्होंने लगातार दो बार इस प्रतियोगिता में पदक जीता है। 

पहले मैच में हार के बाद शानदार वापसी
विनेश ने पहले मैच में हार के बाद शानदार वापसी की थी। उन्होंने रेपचेज में अपने दो मुकाबले जीते। इसके बाद कांस्य पदक का मैच भी अपने नाम किया। खास बात यह थी कि इस दौरान उन्होंने कोई प्वाइंट नहीं गंवाया। 

इस 28 साल की पहलवान को आलोचना से काफी निराशा हुई और जवाब में उन्होंने लिखा “एथलीट इंसान होते हैं और एक एथलीट होने के नाते यह अहम है कि हम क्या हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हम हर टूर्नामेंट का एलान होने के बाद रोबोट की तरह काम करते हैं। मुझे नहीं पता कि यह रिवाज हर देश में है या सिर्फ भारत में बहुत सारे एक्सपर्ट घर में बैठे रहते हैं। हर व्यक्ति, पेशेवर या सामान्य अपने जीवन में मुश्किलों, संघर्ष और चुनौतियों का सामना करता है। अंतर यह है कि दुनिया उन पर कोई टिप्पणी या आलोचना नहीं करता, यह सोचते हुए कि वह उन पेशेवरों और उनके करियर पर विशेषज्ञ है। लेकिन खेल में कई लोग ऐसे हैं, जो खुद को विशेषज्ञ मानते हैं, जिन्हें लगता है कि उन्हें पता है कि एक एथलीट की ट्रेनिंग में कितनी मुश्किलें आती हैं और कितनी मेहनत लगती है।”

खिलाड़ियों की आलोचना करने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए विनेश ने लिखा “हम एथलीट के रूप में हर विवरण के बारे में उनके लिए जवाबदेह क्यों हैं, जब समय कठिन होने पर समर्थन और प्रोत्साहन के बजाय हमें यह बताया जाता है कि हमारा प्रशिक्षण कैसे होना चाहिए और हमें क्या करना चाहिए। यह बहुत हतोत्साहित करने वाला होता है जब लोग यह मान लेते हैं कि वे इस पर टिप्पणी कर सकते हैं कि एथलीटों को अपना करियर कब रोकना चाहिए या कब समाप्त करना चाहिए, कब खेलना चाहिए और कब नहीं खेलना चाहिए।
उन्होंने लिखा “एक जीत का मतलब हमेशा यह नहीं होता है कि एक एथलीट ने कुछ अतिरिक्त असाधारण किया है और हार का मतलब यह नहीं है कि एथलीट ने उस मैच के दौरान जीतने कोशिश नहीं की है। जीत और हार हर एथलीट के जीवन का हिस्सा हैं और एथलीट हर बार कड़ी मेहनत करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आलोचकों को उन प्रयासों और संसाधनों के बारे में कोई जानकारी नहीं है जो एक एथलीट की तैयारी में जाते हैं। विनेश ने लिखा “इन चीजों पर टिप्पणी करना बहुत आसान है ,क्योंकि उनके लिए यह मैच देखने के बाद यह सामान्य बात है। उन्हें इस बात का एहसास नहीं है कि ये चीजें किसी एथलीट के जीवन को मुश्किल बना सकती हैं। सोशल मीडिया में अब सभी प्रशंसकों और समर्थकों आप से जुड़ते हैं। यह अच्छा है, लेकिन समय सरल था, जब सोशल मीडिया इन टिप्पणियों और नकारात्मक आलोचनाओं का सामना नहीं करना पड़ता था।”

विनेश ने साथी भारतीय एथलीटों को सपने देखते रहने और कड़ी मेहनत करने के लिए कहा और उम्मीद जताई कि अनावश्यक आलोचना समाप्त हो जाएगी।

“यह मेरे सभी साथी एथलीटों के लिए है, जो एक कठिन मेहनत के जरिए और लोगों से डरे बिना अपने सपने के प्रति करुणा दिखाने का साहस रखते हैं। मेरे प्रिय एथलीटों, हम सभी एक ही स्थिति में हैं और हमारी हालत समान है। उम्मीद है, किसी दिन हम अपने निरंतर प्रयासों, साहस और समर्पण के साथ इस संस्कृति को बदलने की कोशिश करेंगे।”

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विश्व चैंपियनशिप में भारतीय पहलवानों ने दो पदक अपने नाम किए हैं। विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया ने कांस्य पदक अपने नाम किया। राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के 12 पहलवानों ने भाग लिया था और सभी ने पदक जीते थे, लेकिन विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारतीय पहलवान आशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके। कांस्य पदक जीतने वाली विनेश फोगाट को अपने पहले ही मैच में हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, रेपचेज राउंड में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं। 

क्वालिफाइंग राउंड में विनेश को मंगोलिया की खुलन बटखुयाग के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। यह मैच वह 0-7 के अंतर से हार गई थीं। इसके बाद उनकी जमकर आलोचना हुई थी। अब विनेश ने अपने आलोचकों को करारा जवाब देते हुए कहा है कि वह एथलीट हैं, रोबोट नहीं। इसके साथ ही उन्होंने अपने साथी खिलाड़ियों से लगातार मेहनत करते रहने के लिए कहा है, ताकि आलोचना की यह परंपरा खत्म हो सके। 

विनेश ने इससे पहले भी विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में पदक अपने नाम किया था। इस बार भी 53 किलोग्राम भारवर्ग में पदक जीतने के साथ ही वह भारत की पहली महिला पहलवान बन गईं, जिन्होंने लगातार दो बार इस प्रतियोगिता में पदक जीता है। 

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